देहरादून, जुलाई 24 -- देहरादून। प्रमुख संवाददाता भविष्य की तकनीकें सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। यह तकनीकें तभी सार्थक होंगी, जब वह समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए किफायती, सुलभ और उपयोगी होने के साथ जनकल्याण का प्रभावी माध्यम भी बने। ये बात विशेषज्ञों ने ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में शुक्रवार से शुरू सतत कंप्यूटेशनल तकनीक सम्मेलन में कही।

तकनीक की सार्थकता एआईसीटीई ,यूजीसी की मेंबर सेक्रेटरी और दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर श्यामा रथ ने कहा कि ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की निरंतर बेहतर होती स्थिति देश के नवाचार आधारित विकास की सशक्त पहचान है। कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि तकनीक की वास्तविक सार्थकता उसकी जटिलता या नवीनता से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह लोगों के जीवन को कितना बेहतर ...