नई दिल्ली, अप्रैल 28 -- हमारे जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी घटित होती है, जो हमारे ऊपर ऐसी छाप छोड़ जाती हैं जिससे प्रभावित होकर हम कुछ बड़ा करने का निर्णय ले लेते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ था, डॉ.अरुण कुमार झा (डॉ. ए.के. झा) के साथ। बाल्यावस्था में उन्होंने अपनी मां को बेहतर इलाज न मिल पाने के कारण दम तोड़ते देखा था और तभी सोच लिया कि अब उन्हें चिकित्सक बनना है। जीवन के इस गहरे सदमे से वह दु:खी जरूर हुए, लेकिन हालातों का सामना करते हुए और अपनी मां को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए वह डॉक्टर बने। आज वह संपूर्ण बिहार के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। पिछले 40 वर्षों से लोगों की सेवा और इलाज कर उन्होंने ये सिद्ध कर दिया है कि वह असल मायने में बिहार का गौरव हैं। डॉ. झा सतत परिश्रम, प्रतिबद्धता एवं नि:स्वार्थ सेवा भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।जीवन की वो घटना...