प्रयागराज, जनवरी 25 -- माघ मेला क्षेत्र के सदानन्द तत्वज्ञान परिषद शिविर में सत्संग आयोजित किया गया। इस मौके पर संत दीपक ने कहा कि सच्चे गुरु की पहचान सच्चे ज्ञान के आधार पर होती है। सच्चा ज्ञान उसे कहते हैं, जिसमें चार अक्षर वाले भगवान का साक्षात दर्शन हो। यदि ज्ञान सच नहीं है तो भगवान भी सच नहीं हो सकता। ज्ञान के सच न होने पर ज्ञान का दाता गुरु भला कैसे सच हो सकता है। सच्चे गुरु से सच्चा ज्ञान और सच्चे ज्ञान में सच्चा भगवान निहित होता है। संत दिलेश्वरानंद ने कहा कि यह शरीर एक मशीन है, यह साढ़े तीन हाथ का शरीर एक ऐसी मशीन है, जो दुनिया की सारी मशीनों को बनाता है। इसलिए हमें शास्त्रों का अध्ययन करना करना चाहिए। संतों का सत्संग सुनना चाहिए।
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