हापुड़, जनवरी 1 -- लाला गंगा सहाय धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस परम पूज्य स्वामी व्यास जी महाराज ने भक्तों को मित्रता का वास्तविक अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि यदि सच्ची मित्रता करनी है तो वह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसा होने चाहिए, जिसमें न स्वार्थ होता है और न ही अहंकार। स्वमी व्यास जी महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा के लिए सुदामापुरी का निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्र वही होता है जो अपने दुख को अपना दुख समझे। कथा के दौरान राजा परीक्षित की मुक्ति का भी प्रसंग भी सुनाया गया और बताया गया कि मानव जीवन कि मुक्ति एकमात्र साधन श्रीमद्भागवत कथा है। उन्होंने कहा की भगवान समय-समय पर पृथ्वी पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते है और अपने उद...