सहारनपुर, दिसम्बर 16 -- बृजेश नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भागवत रूपी ज्ञान अमृत की वर्षा करते हुए प्रसिद्ध भागवताचार्य आत्मानुभवी महाराज ने सत्संग और विवेक के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्संग के बिना विवेक संभव नहीं है और विवेक के अभाव में मनुष्य के जीवन की कोई स्पष्ट दिशा नहीं होती। सत्संग के माध्यम से ही व्यक्ति सही और गलत का भेद समझ पाता है तथा अपने जीवन को सही मार्ग पर अग्रसर कर सकता है। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि सत्संग को जीवन का अभिन्न अंग बनाकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि विवेकहीन व्यक्ति चाहे कितना ही धनवान, उच्च पद पर आसीन या कितना ही शिक्षित क्यों न हो, वह अधिक समय तक स्थिर नहीं रह सकता।

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