मेरठ, मई 27 -- शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में श्रमण संस्कार शिविर में बुधवार को पंडित सर्वज्ञ शास्त्री के सानिध्य में आयोजित "रत्नकरण्ड श्रावकाचार" की कक्षा में श्रद्धालुओं को श्रावक के आदर्श आचरण और सच्चे देव, शास्त्र और गुरु का महत्व बताया। बताया गया कि श्रावक का जीवन धर्म, संयम और शुद्ध आचरण पर आधारित होता है। एक आदर्श श्रावक अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे महान व्रतों का पालन करते हुए आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग की प्राप्ति को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाता है। सच्चा देव वही है जो राग, द्वेष और मोह से पूर्णतः रहित हो। सच्चा शास्त्र वह है जो जीव को सही मार्ग दिखाकर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्रदान करे और सच्चा गुरु वह है जो स्वयं धर्म का पालन करते हुए दूसरों को भी धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा दे।पंडित यह भी...