सच्चा मानव व संत होने के लिए पौथी की जरूरत नहीं
मैनपुरी, मई 17 -- कचहरी रोड स्थित रज्जो देवी कबीर आश्रम पर सत्संग का आयोजन हुआ। सत्संग में आश्रम के महंत अमर साहब ने कहा कि जितना स्वार्थ जागेगा उतने हम दुखी होते चले जाएंगे। जहां त्याग भाव होता है वहीं प्रेम होता है। कहा कि सत्संग का अर्थ अच्छी बात को ग्रहण करें और बुरी बातों व आदतों को छोड़ दें। महंत ने कहा कि हाथी किसी गांव से निकलता है तो लोग गणेश मानकर हाथ जोड़कर खड़ा हो जाते हैं लेकिन हाथी को हाथ जोड़ने वाले से भी कोई खास मतलब नहीं होता। कुत्ते भोंकते हैं लेकिन हाथी को कोई फर्क नहीं पड़ता। उसी तरह वास्तव में जिसे आत्मज्ञान हो जाता है, उस पर दूसरे लोगों के बुरे विचारों का प्रभाव नहीं पड़ता है। वह हमेशा सत्य के मार्ग पर चलता रहता है। महंत ने कहा कि प्रेम जीवन का वह रसायन व औषधि है, जो जीवन जीने की कला सिखाता है। सच्चे मानव, सच्चे भक्त...
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