मेरठ, मार्च 15 -- चिन्मय मिशन मेरठ के तत्वावधान में शिव मंदिर, साकेत स्थित सत्संग भवन में चल रहे ज्ञान यज्ञ में स्वामी मतीश्वरानन्द सरस्वती महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 15 पर प्रवचन दिया। कहा कि सच्चा भक्त मान सम्मान से प्रसन्न नहीं होता और संसारिक आसक्ति से मुक्त होकर स्वयं को भगवान का मानता है। ऐसी भावना से भक्त हर्ष शोक, राग द्वेष से ऊपर उठकर हर परिस्थिति को भगवान का प्रसाद मानता है और अंततः परम पद को प्राप्त करता है। स्वामी ने बताया कि आत्मस्वरूप की प्राप्ति के लिए कर्मयोग, भक्ति योग, ज्ञान योग और ध्यान योग की साधना आवश्यक है। कर्मयोग में कर्ता भोक्ता भाव त्यागकर कर्म करना चाहिए, जबकि भक्ति योग में भगवान से माता पिता, पुत्र आदि किसी भी संबंध से प्रेमभाव स्थापित कर श्रद्धा को दृढ़ किया जाता है। इसके बाद ज्ञान और ध्यान साधना से ...