नई दिल्ली, सितम्बर 6 -- क्रिकेट बेशक प्रतिभा का खेल है, लेकिन इसमें शारीरिक फिटनेस और थोड़ी सी किस्मत का साथ ना हो तो बड़े से बड़ा प्रतिभावान क्रिकेटर भी अर्श से फर्श तक कब चला जाता है पता भी नहीं चलता। आज हम आपको एक ऐसे ही क्रिकेटर की कहानी बता रहे हैं, जिसने सचिन तेंदुलकर के साथ साल 1989 में डेब्यू किया, लेकिन एक ही टेस्ट मैच में करियर सिमटकर रह गया। वनडे क्रिकेट में कुल 20 मैच खेले, लेकिन जिंदगी ने उनके साथ जो खेल दिखाया इसके कारण कभी भी अपनी प्रतिभा से न्याय नहीं कर पाए। परिस्थितियों के कारण 28 साल की उम्र में ही उन्हें क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा और अब जिंदगी के अगले पड़ाव में भी आलम ये है कि अवसादों से जूझना पड़ रहा है। हालात अब सामान्य हैं, लेकिन उतने नहीं, जितने किसी सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के होते हैं। यह भी पढ़ें- LIVE: फाइनल में...