प्रयागराज, मई 9 -- एनसीजेडसीसी में आयोजित विमर्श शृंखला के तहत शनिवार को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गंगा नाथ परिसर के साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. जनार्दन प्रसाद पांडेय 'मणि' ने विचार साझा किए। मणि ने कहा कि संस्कृत रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कार, संस्कृति और जीवन मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत रंगमंच की संरचना व्यवस्थित और वैज्ञानिक थी। इसमें रंगपीठ, नेपथ्य, दर्शक दीर्घा और प्रस्तुति स्थल का विशेष महत्व होता था। नाट्य प्रस्तुति में संगीत, नृत्य, अभिनय और संवाद का संतुलित समन्वय देखने को मिलता था। मुख्य वक्ता 'मणि' के संस्कृत साहित्य में 11 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें संस्कृत संस्थान व संस्थाओं की ओर से 28 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने 10 नाटकों म...