संस्कृति और संस्कार से ही भारत की पहचान
गंगापार, सितम्बर 6 -- स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत चाहे कितने भी वर्षो तक गुलामी की बेड़ियों में बंधा रहे पर यह मिट नहीं सकता क्योंकि भारत की आत्मा उसके गावों में बसती है। जहां की संस्कृति, संस्कार और अनुशासन से देश की भी पहचान बनती है। लेकिन दुर्भाग्य हैं कि हम अपने नैतिक मूल्यों, परिवार के संगठन को ह्रास की ओर देख रहे हैं। संगठित, अनुशासित, सनातन, संस्कारित और भारतीय परिवार को संरक्षित रखने की आवश्यकता है। उक्त बातें फूलपुर के बौड़ई स्थित आरएसएस जिला कार्यालय केशव सदन में आयोजित तहसील स्तरीय प्रबुद्ध जन संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख मिथिलेश नारायण ने कहीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने सौ पूरे करने को है। संघ ने टूटते बिखरते परिवारों को बचाने को दृष्टिगत रखते हुए ही कुटुंब प्रब...
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