हरिद्वार, अप्रैल 19 -- गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार चौहान ने शारीरिक शिक्षा के प्रशिक्षुओं से संवाद करते हुए कहा कि संस्कृति एवं संस्कार जीवन में अनुशासन, नैतिकता और संतुलन स्थापित करने के आधारभूत स्तंभ हैं। इनके बिना व्यक्ति का जीवन निरर्थक एवं निष्प्रयोज्य हो जाता है। वर्तमान परिवेश में संस्कृति की रक्षा और संस्कारों के संवर्धन में संस्कृत एवं शारीरिक शिक्षा बेहतर माध्यम सिद्ध हो सकती है। डॉ. चौहान ने कहा कि शिक्षक के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को अपने व्यक्तित्व में चरित्र निर्माण, ईमानदारी और सहनशीलता जैसे गुण विकसित करने चाहिए। संवाद कार्यक्रम में अनिकेत कौशिक, निखिल प्रजापति, रजत ओरान, अंशुमान बिश्नोई, उदित कुमार सहित अन्य प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
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