प्रयागराज, फरवरी 25 -- महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा और भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के संयुक्त तत्वावधान में 'वंदे मातरम के सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवबोध' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी का बुधवार को उद्घाटन हुआ। मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और हजारों बलिदानों की गाथा है। उन्होंने इसके तीन मुख्य आयामों सांस्कृतिक राष्ट्रदर्शन, एकत्व और स्वदेशी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने इसे 'स्व-जागरण का मंत्र' और 'राष्ट्र चेतना की आवाज' बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने गीत की ऐतिहासिक और भू-सांस्कृतिक यात्रा का उल्लेख किया। ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.