मथुरा, जुलाई 8 -- मांट। संसार में भगवान की इच्छा के बिना कुछ भी संभव नहीं होता। जब तक भगवान नहीं चाहते, तब तक कोई भी कार्य सफल नहीं होता। यह विचार देवकीनंदन महाराज ने बंसीवट धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल के कारण बच्चे माता-पिता से दूर हो रहे हैं। उनका ध्यान पढ़ाई, भक्ति एवं अच्छे कार्यों से हटता जा रहा है। जो शिष्य अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, उसे अवश्य भगवत प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि कभी निर्वस्त्र स्नान या भोजन नहीं करने चाहिए। यह धर्म, आचार एवं मर्यादा विरुद्ध है। शास्त्रों में कहा है कि भोजन व स्नान करते समय शरीर हमेशा वस्त्र से ढका होना चाहिए, तभी उसका पुण्य एवं शुद्धि प्राप्त होती है। तीर्थों पर कभी पर्यटक बनकर नहीं जाना चाहिए। सोमवार की कथा में महारास, कंस वध, उद्धव-ग...
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