प्रयागराज, जनवरी 24 -- माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-6 में चल रहे पांच दिवसीय जय स्वर्वेद कथा के दूसरे दिन शनिवार को संत प्रवर विज्ञान देव ने कहा कि मनुष्य के दुखों का मूल कारण उसका अज्ञान है। संसार में कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं है। अच्छाइयां और बुराइयां सभी के भीतर विद्यमान हैं। हमें अपनी दुर्बलताओं से घबराने के बजाए स्वर्वेद के आध्यात्मिक आलोक से शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त करना चाहिए, क्योंकि हमारे भीतर परमात्मा अंतरात्मा रूप में स्थित हैं। उन्होंने विहंगम योग की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि यह साधना खुद से खुद की दूरी मिटाने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग है। संगीतमय स्वर्वेद कथा ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इससे पूर्व योग प्रशिक्षकों ने साधकों को आसन व प्राणायाम का अभ्यास कराया। साथ ही विश्व शांति हेतु 2100 कुण्डीय वैद...