भागलपुर, मई 21 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। परमात्मा ही परम सत्य है। जब मनुष्य की वृति परमात्मा में स्थिर हो जाती है तब संसार का मोह स्वतः समाप्त होने लगता है। भगवान संसार में व्याप्त भी है और उससे अलग भी हैं। उक्त बातें लगमा हाट कहलगांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचन करते हुए स्वामी माधवानन्द महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कही है।

भगवान का उदाहरण उन्होंने आकाश और बादल का उदाहरण देते हुए कहा कि बादल आकाश में ही उत्पन्न होते हैं और उनके भीतर भी आकाश तत्व विद्यमान रहता है, किंतु बादलों के समाप्त हो जाने पर भी आकाश का अस्तित्व बना रहता है। उसी प्रकार संसार नश्वर है, लेकिन परमात्मा शाश्वत हैं। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से पृथक नहीं है।

श्रीकृष्ण की लीला भगवान श्रीकृष्ण की माखन च...