मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 30 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। मनुष्य को संसार की चर्चा और चिंता करने से पहले स्वयं के बारे में विचार करने की आवश्यकता है। हमें स्वयं के लिए भगवान के आश्रय में ले जाने की आवश्यकता होती है किसी और के लिए नहीं। भक्ति पथ पर बने रहने के लिए ही निरंतर भगवान की कथा का श्रवण करना आवश्यक है। ये बातें जिला स्कूल के प्रांगण में हरियाणा सेवा संघ के द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा की पूर्णाहुति के अवसर पर मंगलवार को कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान और भगत के बीच भक्ति का ही एकमात्र नाता होता है। भगवान और सत्कर्मों में जिसकी जितनी श्रद्धा होती है, उतना ही हमारा कल्याण भी होता है। स्नान से शरीर की बाह्य शुद्धि होती है। मन की शुद्धि तो शुद्ध अन्न से ही होता है। धर्मपूर्वक अर्जन से जो अन्न हम ग्रहण...
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