नई दिल्ली।, अगस्त 13 -- Monsoon Session: संसद का मॉनसून सत्र लगातार हंगामे, नारेबाजी और राजनीतिक गतिरोध के बाद आखिरकार अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक यानी कि 19 दिनों के इस सत्र में कानून तो पास हुए, लेकिन बहस, सरकार से सवाल-जवाब और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के आंकड़े निराशाजनक रहे। हंगामे की आड़ में न सिर्फ करदाताओं का करोड़ों रुपया व्यर्थ गया, बल्कि संसद में लोकतंत्र का सबसे अहम जरिया प्रश्नकाल सबसे बड़ा शिकार बना। संसद में व्यवधान के आर्थिक नुकसान को समझने के लिए साल 2012 का एक आंकड़ा अक्सर उदाहरण के तौर पर देखा जाता है। तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल के अनुसार, संसद चलाने में हर मिनट करीब 2.5 लाख रुपये का खर्च आता है। इनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों का खर्चा शामिल है। अगर इस आंकड़े में ...