लखनऊ, मार्च 31 -- लखनऊ। पुनर्वास विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग में दो दिवसीय कला उत्सव का अयोजन हुआ। बीएचयू कला इतिहास विभाग के प्रो. आचार्य शांति स्वरूप सिन्हा ने कहा कि चित्र रचना के पूर्व देखने और विश्लेषण करने की प्रवृत्ति का विकास करना चाहिए। रचना प्रक्रिया को निरन्तर विकसित और अद्यतन करने का प्रयास करना चाहिए। संवेदनशीलता कलाकार का पहला गुण है। आचार्य मनीष अरोड़ा ने कहा कि एआई आज की अनिवार्यता है। बीएचयू के प्रो. अमरेश कुमार ने कहा कि मिट्टी ही एक ऐसा माध्यम है जो शत प्रतिशत मूर्तन के अनुकूल होती है। प्रो.मनीष अरोड़ा, डॉ. अवधेश मिश्र, ललित कला एवं प्रदर्शन कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पी राजीव नयन, डॉ. सुनीता शर्मा, सुकृति मिश्रा, डॉ. मधु शर्मा ने विचार रखे।

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