संविधान काम के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं बनाता, यह सिर्फ एक लोकतांत्रिक आकांक्षा है- सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, अगस्त 21 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि 'क्या ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार की कानूनी गारंटी को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सम्मान के मौलिक अधिकार के बराबर माना जा सकता है? शीर्ष अदालत ने सरकारी योजनाओं में काम करने वाले श्रमिकों को देरी से या राज्य में लागू न्यूनतम मजदूरी से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
संविधान की व्याख्या मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि 'संविधान काम के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं मानता है। पीठ ने कहा कि संविधान इसे राज्य की नीति के निर्देशक सिद्धांतों के तहत राज्य की जिम्मेदारियों में शामिल करता है।' जस्टिस बागची ने कहा 'संविधान काम के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं बनाता है। असल म...
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