कटिहार, अप्रैल 20 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि कटिहार और सीमांचल की उपजाऊ धरती आज भी धान, गेहूं, मक्का, दलहन और तेलहन की फसलें उगा रही है, लेकिन खेतों की हरियाली के पीछे किसानों का दर्द गहराता जा रहा है। कभी यही खेती गांवों की समृद्धि और सम्मान का आधार थी, मगर अब बढ़ती लागत, बेमौसम बारिश, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि और बाजार में उचित दाम नहीं मिलने से अन्नदाता टूट रहा है। खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि मेहनत का मूल्य घटता जा रहा है। कई पारंपरिक फसलें खेतों से गायब हो रही हैं, युवा खेती से दूरी बना रहे हैं और किसान कर्ज के बोझ तले दब रहा है। यह भी पढ़ें- इंट्रो जोड़ :धरती पुत्रों की व्यथा 09 धरती पुत्र हर मौसम में उम्मीद बोता है, मगर बदले में चिंता, घाटा और निराशा काटता है। यही गांवों की सबसे बड़ी सच्चाई बन ...
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