नई दिल्ली, सितम्बर 8 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया कि क्या पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर किए गए कबूलनामे के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत‌) का आदेश जारी किया जा सकता है? शीर्ष अदालत ने संभल हिंसा से जुड़े मामले में एक व्यक्ति को एनएसए के तहत नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने नवंबर 2024 की संभल हिंसा के कथित तौर पर मास्टरमाइंड होने के आरोपी मुल्ला अफरोज की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए राज्य सरकार से यह सवाल किया।

मामले में कबूलनामा अफरोज ने एनएसए के तहत अपनी नजरबंदी को चुनौती दी है। पीठ ने पुलिस हिरासत में कथित तौर पर किए गए कबूलनामे की प्रासंगिकता...