समस्तीपुर, मार्च 22 -- विभूतिपुर। संपूर्ण मानवता का दर्शन श्री रामचरित मानस है। इसमें सत्य, धर्म, गुरु सेवा, संत दर्शन, पितृ भातृ प्रेम, प्रजा प्रेम जैसे मानवीय सारे गुणों के दिग्दर्शन का समुच्चय है। उक्त प्रवचन विक्रम संवत 2083 के नव वर्ष पर महिषी निवासी अरुण कुमार झा के आवास पर आयोजित मानस गोष्ठी में डॉ पीके राय ने दी। उन्होंने कहा की दर्पण हमारे गुण दोष को यथावत दिखाता है। अयोध्या में दशरथ की सभा में दर्पण की बात आती है परंतु लंका में नहीं। डॉ उमेश चौधरी ने सनातन धर्म के इतिहास एवं आज भी उसकी आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। वही नंदकिशोर सिंह ने शांति और विनम्रता का अर्थ कायरता नहीं है इस पर जोर दिया। गोष्टी के संयोजक अरुण कुमार झा ने वीर सम्राट विक्रमादित्य का परिचय के साथ उनके नवरत्नों में महान खगोल शास्त्री, ज्योतिष विद, वराह मिहिर ...
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