नई दिल्ली, अक्टूबर 21 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी व्यक्ति की आवाजाही को प्रतिबंधित करने वाले निर्वासन आदेश का इस्तेमाल पूरी तरह से निराधार आधार पर लोगों को उनकी स्वतंत्रता व आजीविका के अधिकार से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कहा कि निर्वासन आदेश किसी व्यक्ति की आवाजाही को सीमित व प्रतिबंधित करने वाला एक असाधारण उपाय है। ऐसे आदेश यांत्रिक तरीके से नहीं बनाए जाने चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हालांकि इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि समाज में कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण दायित्व पुलिस पर है। लेकिन साथ ही इसका इस्तेमाल पूरी तरह से बगैर आधार पर लोगों को उनकी स्वतंत्रता व आजीविका के अधिकार से वंचित करने के लिए नहीं किया जा ...
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