संपत्ति बंटी, रिश्ते नहीं.. 'गिरवी' ने छुआ दर्शकों का मन
प्रयागराज, सितम्बर 18 -- प्रयागराज, संवाददाता। घर अलग हो सकता है, चूल्हा अलग हो सकता है और संपत्ति के कागज भी बांटे जा सकते हैं लेकिन क्या रिश्तों को भी बांटा जा सकता है। इसी सवाल के केंद्र में रखते हुए युवा रंगकर्मियों ने शुक्रवार को स्वराज विद्यापीठ के परिसर में हिंदी लघु नाटक 'गिरवी' का मंचन किया गया। नाट्य प्रस्तुति के साथ ही स्वराज विद्यापीठ व कैनवास फाउंडेशन की ओर से आयोजित 45 दिवसीय प्रस्तुतिपरक युवा रंगमंच कार्यशाला का समापन हुआ।नाटक विष्णु प्रभाकर के एकांकी 'विभाजन' पर आधारित था। नाटक की कहानी प्रभुदयाल उसकी पत्नी भगवती व छोटे भाई देवराज के इर्दगिर्द आगे बढ़ती है। परिवार के सामने आर्थिक संकट आता है और पैसों की आवश्यकता के बीच पैतृक दुकान को गिरवी रखने का निर्णय लिया जाता है। मंच पर सत्यम राय, सुप्रिया पाल, आनंद कुमार, आशीष पाल, अ...
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