धनबाद, जनवरी 11 -- धनबाद, वरीय संवाददाता धैया रॉयल पाम में चल रही भागवत कथा में पांचवें दिन शनिवार को आचार्य पवन नंदन ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बखान किया। बताया कि भगवान ने कुबेर के दोनों पुत्र जो की वृक्ष के रूप में थे, उनका भी उद्धार किया। गिरिराज पर्वत की पूजा और अपनी कनिष्ठ अंगुली पर धारण कर संदेश दिया। साथ ही इंद्र के अहंकार को तोड़ा। उन्होंने बताया कि संन्यास आवरण का नहीं, आचरण का विषय है। जीवन का आचरण कैसा है, यह महत्वपूर्ण बात है। कथा भगवान की लालसा पैदा करती है, लालसा पैदा होती है तो मार्ग प्रशस्त होता है। कथा जीवन की दिशा बदलती है, जब दिशा बदलती है तो दशा भी बदलती है। बताया कि संपत्ति केवल भोग के लिए नहीं है, राष्ट्र के विकास और धर्म के पोषण के लिए होनी चाहिए। सुख-शांति से जीवन व्यतीत करने के लिए नियम निर्धारित हैं। नियम से ...
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