पूर्णिया, मार्च 19 -- जानकीनगर, एक संवाददाता।चकमका में आयोजित बिहार प्रांतीय संतमत-सत्संग के 31वें अधिवेशन में स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि सच्चा संत वही है जो सत्य को जान लेता है, परमात्मा को पहचान लेता है और आत्मबोध प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि जप और ध्यान से मन को ऊर्जा मिलती है और साधक शिवत्व की ओर अग्रसर होता है। सदगुरु महर्षि मेंही परमहंसजी के सिद्धपीठ भागलपुर से आए स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि परमात्मा किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। उसे पाने के लिए अंतर्मुख साधना, सदाचार और सत्संग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्संग मन का भोजन है, जबकि ध्यान साधना आत्मा का पोषण करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे नाले का जल गंगा में मिलकर पवित्र हो जाता है, वैसे ही संतों के सान्निध्य से व्यक्ति का जीवन ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.