मधुबनी, दिसम्बर 27 -- बेनीपट्टी, निज प्रतिनिधि। कबीर एक संत ही नहीं बल्कि सामाजिक कुरीतियों को हटाने के लिए एक राहगीर के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके राह पर चलकर कई संतो ने अपने जीवन के अंतिम सांस तक एक समरस समाज की स्थापना में अपनी जीवन लीला का अंत किया। वैसे ही संतों में संत फलहारी बाबा थे। बेनीपट्टी के अरेर के ब्रहेतरा गांव में उनके 34वें पुण्यतिथि पर आयोजित संत सम्मेलन में अपनी बातें रखते हुए समस्तीपुर रोसरा कुट्टी के महंथ आचार्य विद्यानंद शास्त्री ने शनिवार को कही। महंथ स्वरूपानंद साहेब एवं महंथ सत्यप्रकाश साहेब ने कहा कि कबीर के बंदगी के हर शब्द एक नई समाज की परिकल्पना से भरा है। उन्होने कहा कि समाज से ऊंच नीच की भावना को खत्म कर एक समरस समाज की स्थापना की सोच फलाहारी साहेब में थी। इस राह पर चलकर ही मानव कल्याण किया जा सकता है। संत...
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