रांची, दिसम्बर 27 -- मुरहू, प्रतिनिधि। महर्षि मेंही आश्रम मलियादा मुरहू ग्राम में आयोजित दो दिवसीय विशेष सत्संग कार्यक्रम के दौरान पहले दिन शनिवार को भागलपुर आश्रम के स्वामी डॉ निर्मलानंद जी महाराज ने संतों की करुणा, प्रेम और सत्संग की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि संतों का हृदय नवनीत अर्थात मक्खन के समान होता है, जो दूसरों का दुःख देखकर तुरंत पिघल जाता है। संत समाज को जोड़ने और मानवता को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। स्वामी जी ने प्रभु ईसा मसीह का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कुछ लोग एक व्यक्ति को बुरा कहकर उस पर पत्थर मारने को तैयार थे, तब ईसा मसीह ने समझाया कि वही पत्थर मारे जिसने जीवन में कभी कोई गलत कार्य न किया हो। यह सुनकर लोग शांत हो गए और ईसा मसीह ने उस व्यक्ति को गले लगाकर सत्संग के ज्ञान से उ...