हाथरस, जनवरी 12 -- हाथरस, हिन्दुस्तान संवाद। संतोषी सदा सुखी यूं ही नहीं कहा गया है। भले ही बाहर में सारे साधन और वैभव न भी हों लेकिन अन्त करण से संतुष्ट आत्मा ही सदा सुखी रहती है। प्रत्येक जीवात्मा और स्वयं के प्रत्येक कर्म को साक्षी होकर देखने वाला ही सदा संतुष्ट रह सकता है। ध्यान योग इंसान को साक्षी दृष्टा और संतुष्ट बनाता है। उक्त बातें प्रजापिता ब्रहमाकुमारी ईश्वरीय विश्व विदयालय के अलीगढ रोड स्थित आनन्दपुरी कालोनी केन्द्र पर राजयोग शिक्षिका बीके शान्ता बहिन ने कहीं। ब्रहमाबाबा के स्मृति दिवस 18 जनवरी के परिप्रेक्ष्य में विश्व शान्ति दिवस मनाया जाता है । पूरे माह तक ध्यानयोग साधना के कार्यक्रमों का आयेाजन रहता है। इसी क्रम में बीके शान्ता बहिन ने कहा कि संतुष्ट आत्मा कभी परेशान नहीं होती। क्योंकि उसे हर एक परिस्थति कठपुतली के खेल की ...
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