कानपुर, जनवरी 6 -- कानपुर वरिष्ठ संवाददाता संतान की लंबी उम्र, सुख सौभाग्य और खुशहाली के लिए मंगलवार को महिलाओं ने गणेश चौथ संकष्टी (सकट) का व्रत रखा। सकट माता और भगवान गणेश की पूजा की गई। इस दिन तिल और गुड़ को एक रूप देकर इसे काटा जाता है। पौराणिक कथाएं भी सुनी जाती हैं। सकट चौथ पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। चंद्रमा को अर्ध्य देकर व्रत का पारण किया गया। पंडित आचार्य पवन तिवारी ने बताया कि सकट चौथ पर रखे जाने वाले व्रत के प्रभाव से संतान के जीवन में आने वाली सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। माता पार्वती ने अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने के मिलने के लिए व्रत रखा था। घरों में व्रत पूजन में तिल और गुड़ का प्रतीकात्मक बकरा बनाकर उसे काटा गया। संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ, संकटा चौथ, माघी चौथ, तिल चौथ और तिलकुट चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है...
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