संतान की दीर्घायु का अहोई अष्टमी पर्व एक नवंबर को
हापुड़, अक्टूबर 30 -- ब भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय ने बताया कि कार्तिक कृष्ण अष्टमी अर्थात अहोई प्रदोषकालीन पूजन व्रत है, जिसकी पूर्णता अष्टमी तिथि प्राप्त तारों के दर्शन के बाद होता है। अष्टमी तिथि एक नवंबर को अपरान्ह 2 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर दो नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक है।धर्म सिंधु अनुसार कार्तिके कृष्णपक्षे अष्टमी प्रदोषे पूज्या एवं तारा-पूजन के लिए नवमीविद्धा अष्टमी निषेध के आधार पर एक नवंबर को अत्यंत शुभमुहूर्त रविपुष्य योग, सर्वार्थसिद्धि योग, स्थिर लग्न तथा शुभयोग में सायंकाल 5 बजकर 35 मिनट से परम्परानुसार अहोई माता व शिवजी का पूजन किया जाएगा। यह भी पढ़ें- अहोई अष्टमी पूजा सामग्री 2026: व्रत से पहले जुटा लें ये सामान, जानें अहोई माता की पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं पौराणिक मान्...
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