नई दिल्ली, मई 31 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। प्रजनन आयु वर्ग में संतानहीनता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में इसके इलाज की कमी है। हाल में एक अध्ययन में दावा किया गया है कि संतानहीनता का इलाज कराने के लिए 44 फीसदी जोड़ों को कर्ज लेना पड़ा। दरअसल, निजी क्षेत्र में इसका इलाज बेहद महंगा है, जिसे वहन कर पाना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित शोध के अनुसार, देश के पांच अस्पतालों में इलाज करा रहे करीब 500 मरीजों पर यह अध्ययन किया गया। इनमें तीन सरकारी तथा दो निजी क्षेत्र के अस्पताल थे। आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ मुंबई ने कुछ अन्य संस्थानों के साथ मिलकर यह शोध किया। यह भी पढ़ें- महिलाओं के स्वास्थ्य और आईवीएफ पर जागरूकता कार्यक...