संजीदा फैसलों से ही बदलेगा समाज
नई दिल्ली, सितम्बर 30 -- क्षमा शर्मा,वरिष्ठ पत्रकार यह खबर जिसने भी पढ़ी होगी, उसकी आंखों में आंसू न आए हों, ऐसा हो नहीं सकता। यह एक ऐसा अदालती फैसला है, जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए, कम है। इस फैसले में न्याय सिर्फ कानूनी शब्दावली में दर्ज नहीं हुआ है, यह मासूम पीड़िता के आहत मर्म पर मरहम रखता है। यही वजह है कि इसकी इतनी चर्चा हो रही। घटना तीन साल पहले की है। दिल्ली में जुलाई 2023 में एक सात साल की बच्ची के साथ सुमित शाक्य नाम के आदमी ने दुष्कर्म किया था। बच्ची ने अदालत से मांग की थी कि इस 'अंकल' को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक यह बूढ़े न हो जाएं। जुलाई 2026 में रोहिणी कोर्ट की जज रजनी रंगा ने इस मामले में पॉक्सो कानून के तहत दोषी के खिलाफ फैसला सुनाया और फैसले में बच्ची को पत्र लिखा। जज ने बच्ची के साहस की प्रशंसा की कि उसने घटना के बारे...
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