संगीतद्वारकों के आभाव का शास्त्रीय संगीत पर प्रभाव
आरा, मई 11 -- आरा। शास्त्रीय संगीत के प्रमुख केंद्र में आरा की ख्याति रही है। कालांतर में संगीत की गतिविधियों के कारण आरा का स्वर्णिम इतिहास बना है, जिसमें संगीत द्वारकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्व. बक्शी अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने 35 तक वर्षों तक आरा के श्री कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह का आयोजन कर यहां की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उक्त बातें सुविख्यात तबला वादक डॉ. लाल बाबू निराला ने कही। यह भी पढ़ें- अल्मोड़ा में शास्त्रीय संगीत की महफिल में गूंजी तालियांसंगीत संध्या का उद्घाटन स्व. अवधेश जी के पुण्य स्मरण में आयोजित संगीत संध्या का उद्घाटन सुविख्यात तबला वादक डॉ. लाल बाबू निराला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर डॉ. निराला ने स्वतंत्र तबला वादन प्रस्तुत कर समां बांधा। इस अवसर पर बक्शी विकास न...
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