वाराणसी, दिसम्बर 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी आए दक्षिण भारतीय लेखकों के दल के लिए रविवार का दिन खास बन गया। पहले उन्होंने मां गंगा की पवित्र धारा में स्नान किया। इसके बाद महाकवि सुब्रमण्य भारती 'भारतीयार' की स्मृतियों से पहचान बढ़ाई। काशी तमिल संगमम् 4.0 के तहत काशी पहुंचे लेखकों के दल ने हनुमान घाट पर स्नान-ध्यान-तर्पण के विधान पूर्ण किए। गंगा तट पर खड़े होकर पूर्वजों का स्मरण करना शब्दसारथियों के लिए अवस्मरणीय बन गया। घाट के आसपास के प्राचीन देवालयों में दर्शन पूजन के दौरान उन्हें स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के माध्यम से देवालयों से जुड़ी पौराणिक कथाएं और घाट किनारे की प्राचीन इमारतों की ऐतिहासिकता जानने का अवसर मिला। गंगा तट पर अभिभूत कर देने वाले अनुभव के बाद दक्षिण भारतीय शब्दशिल्पी महाकवि सुब्रमण्य भारती की स्मृतियों से जान पहचा...
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