वाराणसी, अप्रैल 10 -- वाराणसी। काशी प्रतीकों और परंपराओं में बसती है। आप देखना चाहें तो ये प्रतीक आप को दिखेंगे। आप इन्हें सुनना चाहें तो आप से बतियाएंगे भी। यही नहीं इसके रस का अनुभव करना चाहें तो आप को स्वाद का अनुभव भी कराएंगे। यह पुस्तक काशी के प्रतीकों की बतकही है।यह कहना है बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. वीएन.मिश्र का। वह संकटमोचन संगीत समारोह के साहित्यिक सत्र में अपनी पुस्तक 'दण्डपाणि च भैरवम्' के लोकार्पण एवं परिचर्चा सत्र में लेखकीय वक्तव्य दे रहे थे। गुरुवार को हुए सत्र में उन्होंने कहा कि काशी के जिन प्रतीकों का इस पुस्तक में उल्लेख किया गया है उनके साथ संवाद करते हुए यह कृति तैयार की गई है। वही संवाद लिपिबद्ध हुआ है। शिव के प्रथम काशी आगमन, देवसभा, स्वर्णअंड विस्फोट आदि के प्रकरण को अंतरराष्ट्रीय चित्रकार अनिल शर्मा ने रंगों स...