वाराणसी, अप्रैल 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। 'नागरी' बनारस की पत्रिका है। यह एक असाधारण चित्त से उपजी संपादन कला का उदाहरण है। इनकी उड़ान बहुत ऊंची है लेकिन जमीन बनारस है। यह बहुवचनात्मक स्वरूप की और लोक लय में लीन होने की पत्रिका है। ये बातें प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहीं। वह संकटमोचन संगीत समारोह के साहित्य कला मंच पर मंगलवार को हुए आयोजन की अध्यक्षता कर रहे थे।नागरी प्रचारिणी सभा की पत्रिका 'नागरी' के लोकार्पण सह परिचर्चा सत्र में प्रो.शुक्ल ने कहा कि यह बौद्धिक ताप और तेवर की पत्रिका है। वर्तमान में काशी जिन चीजों के लिए जानी जाती है इसमें वे सभी संदर्भ आए हैं। यहां की बस्तियों में संस्कृति दिखाई देती है। बनारस की सांस्कृतिक निजता में अगर कुछ है तो वह है यहां का विजुअल्स। विजुअल्स को समझे बिना कोई बनारसी नहीं हो सकता है। संवादधर्मित...