नई दिल्ली, मई 29 -- नई दिल्ली स्थित विख्यात जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार ने हाल में ही अपने नियंत्रण में लेने का फैसला लिया है। इसको लेकर चर्चा गर्म है। जिमखाना क्लब केवल जिम का क्लब नहीं है, बल्कि यह देश में स्थापित हो चुकी अभिजात्य संस्कृति का एक नमूना है। ऐसे क्लब और संस्थाएं देश भर में बहुसंख्या में उग आए हैं, जिन्होंने अपने लिए देश के संविधान से इतर प्रावधान बना रखे हैं। इनकी सदस्यता शुल्क इतनी होती है, जो आम आदमी तो दूर, मध्यम वर्ग और उच्च-मध्यम वर्ग के लिए भी अकल्पनीय होती है। सदस्यता लेने के लिए वर्षों की लंबी लाइन और उबाऊ प्रक्रिया की तो बात ही अलग है। उनकी सदस्यता के प्रावधान आम तौर पर देश के संविधान में प्रदत्त समता के सिद्धांत के विपरीत होते हैं। यह समाज और देश की कानून-व्यवस्था और सांविधानिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है...