लखनऊ, जून 27 -- कमलाकान्त सुन्दरम/ अयोध्या। श्री राम नगरी की पावन भूमि पर स्थित हनुमानगढ़ी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अजेय शक्ति का जीवंत प्रतीक है। यहां एक ओर भक्ति की अविरल धारा बहती है तो दूसरी ओर धर्म रक्षा के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों में पारंगत नागा साधुओं की एक ऐसी फौज तैयार होती है जो सदियों से सनातन परंपरा की ढाल बनी हुई है। यह वही पवित्र स्थान है जहां वैराग्य और वीरता का अद्भुत संगम होता है, जहां साधना और शौर्य एक साथ फलते फूलते हैं। निर्वाणी अनी अखाड़े के इस गौरवशाली मुख्यालय ने सदियों से न केवल आध्यात्मिक साधकों को दिशा दी है, बल्कि उन योद्धा संन्यासियों को भी तराशा है जो आवश्यकता पड़ने पर धर्म की रक्षा के लिए रणभूमि में उतरने से भी नहीं हिचकते। हनुमानगढ़ी की यह परंपरा आज भी उतनी ही सजीव और सशक्त है जितनी सैकड़ो...