हापुड़, जून 3 -- श्री मद् भागवत कथा दूसरे दिन धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कथा व्यास यश कृष्णा आचार्य ने भागवत के श्लोकों और महाभारत के संस्मरणों के माध्यम से जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने द्वारा अर्जित धन का कम से कम दसवां हिस्सा दान अवश्य करना चाहिए। यह दान केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्म शुद्धि और समाज कल्याण का मार्ग भी है।

दान का महत्व दान व्यक्ति को सांसारिक आसक्ति से ऊपर उठाकर परोपकार और संतोष की ओर प्रेरित करता है। कथा के मध्य उन्होंने भीष्म पितामह के जीवन प्रसंगों का स्मरण कराया और बताया कि मृत्यु शैय्या पर उन्होंने अपने परिवार और समाज को उपदेश दिया था कि राजा का प्रथम कर्तव्य है कि वह प्रजा का पालन पुत्रवत करे, न्याय और धर्म को सर्वोपरि रखे और अंत में प्रभु भक...