श्रीहरि ने 13वें मास को दिया अपना नाम 'पुरुषोत्तम'
मुरादाबाद, मई 27 -- बुधबाजार स्थित श्री दुर्गा भवन मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बुधवार को कथा व्यास गिरिजा भूषण मिश्र ने भगवान शुकदेव की कथा सुनाई। उन्होंने तप का महत्व बताया और ब्रह्मा जी के अवतरण और उनके द्वारा सृष्टि की उत्पति का भी वर्णन किया। उन्होंने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान श्री हरि ने नरसिंह का अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध किया। उस दिन तेरहवां मास था। श्री हरि ने उस दिन अपना पुरुषोत्तम नाम दिया तब से ही इस अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। यह भी पढ़ें- प्रह्लाद की कथा बुराई पर अच्छाई और अटूट भक्ति की जीत का प्रतीक: चंदन शरण मुख्य यजमान कमल सपड़ा एवं सोनिया सपड़ा रहे। अशोक वाधवा, तिलक राज कत्याल, तिलक राज सपड़ा, संदीप बजाज, राजेंद्र सपड़ा, विनय सपड़ा, स...
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