वाराणसी, सितम्बर 29 -- रामनगर (वाराणसी), संवाददाता। जनकपुर में प्रभु के चरण पड़े तो हर कोई उनका रंगरूप देख मंत्रमुग्ध हो गया। स्त्रियां तो मान ही बैठी कि जानकी के योग्य यही वर है। यहीं नहीं वे कहने लगीं कि राजा जनक को धनुष यज्ञ की प्रतिज्ञा तोड़ कर सीता का विवाह इन्हीं से कर देना चाहिए। रामलीला के चौथे दिन सोमवार को जनकपुर में ऐसे ही भावपूर्ण प्रसंग साकार हुए। यह भी पढ़ें- श्रीराम ने अवतार का निमित्त साधना शुरू कियासीता की सखियों की प्रशंसा मुनि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण के मन की बात जानने के बाद उनसे संकोच छोड़कर अपने मन की बात कहने को कहते हैं। जिस पर श्रीराम कहते हैं कि लक्ष्मण जनकपुर देखना चाहते हैं लेकिन संकोचवश कह नहीं पा रहे हैं। आपकी आज्ञा हो तो मैं इन्हें जल्दी से नगर दिखा लाऊं। मुनि से आज्ञा लेकर दोनों भाई जनकपुर देखने निकले ...