बरेली, मार्च 9 -- ब्रह्मपुरी में आयोजित 166वीं रामलीला में रविवार को पंचवटी प्रसंग, सूर्पनखा संवाद एवं खर-दूषण वध की लीलाओं का मंचन किया गया। आरम्भ में गुरु व्यास मुनेश्वर महाराज ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास का प्रारम्भिक समय चित्रकूट में बिताया। इसके बाद उन्होंने दंडकारण्य के वनों में रहकर ऋषि-मुनियों की रक्षा करते हुए राक्षसों का संहार किया। इसी दौरान श्रीराम की भेंट महान तपस्वी अगस्त्य मुनि से हुई, जिन्होंने अपने तपोबल से प्राप्त दिव्य अस्त्र-शस्त्र भगवान राम को प्रदान किए और उन्हें पंचवटी में निवास करने का निर्देश दिया। पंचवटी में रावण की बहन सूर्पनखा ने श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे अस्वीकार किए जाने पर उसने माता सीता पर आक्रमण करने का प्रयास किया। इससे क्रोधित होकर लक्ष्मण ने सूर्पनखा ...