बोकारो, फरवरी 16 -- चंदनकियारी। श्रीराम चरित मानस दर्शनशास्र हैं, इनके अध्ययन व श्रवण से मानव जीवन को अपने दायित्व व रिश्ते का बोध होता है उक्त बातें मानस प्रवक्ता सुभाष शास्त्री जी महाराज अयोध्या ने घांघरा गौड़ा में आयोजित पांच दिवसीय रुद्र महायज्ञ सह महाशिवरात्रि महोत्सव में कहा। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में चार घाट, जिन्हें चार मुख्य संवाद या वक्ता-श्रोता प्रसंग माना जाता है, ज्ञान घाट जिसमें शिव-पार्वती है, उपासना घाट जिसमें कागभुशुंडी-गरुड़, का प्रसंग है, कर्म घाट जिसमें याज्ञवल्क्य-भरद्वाज है और शरणागति घाट जिसमें तुलसीदास-संत का प्रसंग है। ये चारों मानस सरोवर के पावन घाट हैं, जो राम कथा को अलग अलग घटना पर प्रस्तुत किया गया है। इसके पूर्व श्रीराम और चरित के साथ साथ मानस पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। घांघरागौड़ा निवासी किसन माहथा, त...