दुमका, फरवरी 27 -- दलाही, प्रतिनिधि। मसलिया प्रखंड क्षेत्र के बासमता गम्हरिया में आयोजित सप्त दिवसिय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ रात्रि में वृंदावन निवासी कथावाचक दुर्गेश नंदन ने कर्म की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कहा कि यह सृष्टि कर्मप्रधान है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति उद्धृत करते हुए कहा, कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा। अर्थात मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। हमारा भारत कर्मभूमि है, यहां बिना कर्म किए फल की अपेक्षा करना व्यर्थ है। यदि कर्म नहीं करेंगे तो फल भी नहीं मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि तुलसीदास जी ने ये भी लिखा है, होइहिं सोइ जो राम रचि राखा। इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य कर्म करना...
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