सिद्धार्थ, जनवरी 10 -- सिद्धार्थनगर, हिन्दुस्तान टीम। श्रीमद्भागवत कथा एक पवित्र ग्रंथ है जिसका महत्व भक्तों के लिए बहुत गहरा है जो मोक्ष और शांति प्रदान करती है। इससे जीवन के लौकिक और आध्यात्मिक विकास में मदद मिलती है। यह सभी वेदों का सार है और भक्तिमार्ग का सोपान मानी जाती है। इसे सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मन शांत होता है। यह बातें डुमरियागंज क्षेत्र के डिवलीडीह मिश्र गांव आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन गुरुवार की रात कथावाचक पंडित राकेश शास्त्री ने कही। कथावाचक ने श्रद्धालुओं को ईश्वर के श्री चरणों से निष्काम प्रेम करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि नारद जी को भगवान के चरणों से निष्काम प्रेम था इसीलिए उन्हें भगवान का सानिध्य प्राप्त हुआ। यही उपदेश नारद जी ने महर्षि वेदव्यास जी को दिया। जब 17 पुराणों का अध्ययन कर...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.