मुजफ्फरपुर, जनवरी 29 -- बंदरा, एक संवाददाता। घोसरामा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को कथावाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने भगवान की बाल लीला और कंस वध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि कर्म करना मनुष्य का धर्म है और फल देना भगवान का काम है। फल की चिंता किए बिना निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए। धनवान व्यक्ति वही है, जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे। अहंकार का त्याग और भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति ही मोक्ष का मार्ग है। इससे पहले आचार्यों के सान्निध्य में यजमान नवीन कुमार, मतलुपुर मुखिया रेखा देवी, दीपक कुमार एवं गणेश ठाकुर ने विधिवत व्यास पूजन किया। चंचला दीदी ने कहा कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद यह मानव तन मिला है, इसका उपयोग सत्य के मार्ग पर चलने में लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रव...