कोडरमा, जून 23 -- झुमरी तिलैया निज प्रतिनिधि। श्री श्री 1008 शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा समिति, संग्रामडीह के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन को श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की रास लीला व रुक्मिणी विवाह प्रसंग का रसपान किया। वृंदावन से आयी कथावाचिका सुश्री दीदी दिव्यांशी जी ने कहा कि कि श्रीमद्भागवत में रास पंचाध्यायी का वही महत्व है, जो मानव शरीर में आत्मा का होता है। उन्होंने बताया कि रास पंचाध्यायी भागवत के दशम स्कंध के 29वें से 33वें अध्याय तक वर्णित है। रास लीला के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची गोपी वही है, जिसकी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं होती और जो केवल भगवान श्रीकृष्ण को ही चाहती है। दीदी दिव्यांशीजी ने रास लीला को भगवान श्रीकृष्ण और कामदेव के बीच हुए आध्यात्मिक युद्ध के रूप में व्याख्य...