उरई, दिसम्बर 10 -- जालौन। संवाददाता जोशियाना स्थित लल्ला तिवारी के आवास पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भागवताचार्य सुखनंदन मयूर ने कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद और रुक्मणि मंगल के प्रसंगों वर्णन किया। भागवताचार्य सुखनंदन मयूर ने कहा कि अत्याचार, अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित होता है। कंस ने भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप से लेकर किशोर वय तक लगातार षड्यंत्र रचे, लेकिन अंततः उसका अंत भगवान के हाथों ही हुआ। यह संदेश है कि धर्म और सत्य की विजय सदा होती है, चाहे अधर्म कितना ही प्रबल क्यों न प्रतीत हो। गोपी-उद्धव संवाद का वर्णन कर कहा कि उद्धव ज्ञान के मार्ग के समर्थक थे, जबकि गोपियों का मार्ग प्रेम और समर्पण का था। गोपियों ने उद्धव से कहा कि हमारा श्रीकृष्ण से संबंध प्रेम और आत्मभाव का है, जिसे कोई तर्क या ज्ञान सीमित नहीं कर सकता। रुक्मणि मंग...